हनुमानजी ने बचाई 15 साल के लकवाग्रस्त भक्त की जान - हनुमानजी के चमत्कार की सच्ची घटना

      





देखकर भगवान पर बढ़ेगा विश्वास आपका क्योंकि आज की यह थोड़ी अलग है आज हम बात करेंगे श्री हनुमान जी के चमत्कार से जुड़ी सच्ची घटना के बारे में श्री हनुमान जी के चमत्कार को अपनी जिंदगी में अनुभव यह महसूस किया है तो आप उनकी सत्य घटना हमसे शेयर कर सकते हैं आपके हनुमान जी के चमत्कार के अनुभव को शेयर करेंगे हमारे देश में कोटी देवी देवता माने जाते हैं उनमें से एक है श्री हनुमान जी भगवान श्री राम के परम भक्त हनुमान जी के सभी कार्यों का वर्णन करना संभव नहीं है शेषनाग भी अपने हजारों मुख से श्री हनुमान जी के कार्यों का वर्णन नहीं कर सकते हैं कहने को तो भगवान हमारे दिलों में बात करते हैं पर अगर श्री हनुमान जी की हो तो वह आज भी धरती पर मौजूद है जी हां आप सोच रहे होंगे हनुमान जी तो त्रेता युग में हुए फिर कलयुग में वह कैसे हो सकते हैं आपने बचपन से ही भगवान श्री राम और भगवान श्री कृष्ण के धरती से जाने की कहानियां सुनी होंगी लेकिन हनुमान जी के यहां से जाने की कोई कहानी किसी ने नहीं सुनी या फिर ना ही इससे जुड़ी किसी जानकारी काजल हिंदू धर्म ग्रंथों में दिया है इसके अलावा और भी कुछ सबूत है जो बताएंगे कि हनुमान जी आज भी जिंदा है और वह हमारे आसपास ई मौजूद है जब श्रीराम अपनी लीला पूर्ण करने के बाद विष्णु लोग में वापस प्रस्थान करने लगे तब उन्होंने हनुमान जी को वरदान दिया था कि जब तक पृथ्वी पर राम कथा का प्रचार होगा तब तक तुम पृथ्वी पर रहकर अनेक जीवो का उद्धार करोगे आज भी जहां कहीं रामकथा या कीर्तन होता है वहां हनुमान जी किसी ना किसी रूप में उपस्थित रहते हैं बजरंगबली बहुत ही दयालु है और अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते हैं इसका उदाहरण आज की और उनके परिवार से जुड़ी एक सच्ची घटना है हम जानेंगे कैसे इस घोर कलयुग में भी श्री हनुमान जी की कृपा से उनके और उनके परिवार पर आने वाली आफत तक जाती है दोस्तों मेरा नाम विकास शर्मा है और मैं राजस्थान का रहने वाला हूं हमारे परिवार पर भी बजरंगबली की कृपा बहुत रही है मेरे दादा जी हनुमान जी को बहुत मानते थे और यही कारण है कि मेरा पूरा परिवार उन्हें मानता है बात 50 साल पुरानी है जब मेरे पिताजी 15 साल के थे खेलते खेलते एक बार अचानक वह एक पत्थर पर गिर पड़े और उस कारण उनकी रीड की हड्डी में चोट आई और वह लकवे के शिकार हुए मेरे दादाजी रेलवे में मामूली नौकरी करते थे और अच्छा इलाज करने में सक्षम नहीं थे उन्होंने मेरे पिताजी को दिल्ली के रेलवे हॉस्पिटल में इलाज के लिए भेज दिया कुछ दिन तक दादा जी उनके साथ रहे परंतु अधिक छुट्टी न मिलने के कारण वह पिताजी को वहां छोड़कर वापस आ गए डॉक्टर ने भी जवाब दे दिया कि लकवा ठीक होना बहुत ही मुश्किल है क्योंकि चोट काफी गंभीर थी मगर मेरे ताजी इससे निराश नहीं हुए डॉक्टर ने बोला कि अंडा खिलाना पड़ेगा पर मेरे पिताजी ने मना कर दिया क्योंकि हम शाकाहारी हैं मेरे पिताजी हॉस्पिटल में लेटे हुए पूरा समय श्रद्धा से श्री हनुमान चालीसा का पाठ पढ़ते रहते थे और एक दिन अचानक रात में उन्होंने देखा कि कोई व्यक्ति गदा लेकर उनके कमरे के बाहर पहरा दे रहा है जब यह बात उन्होंने नर से पूछी तो उसने कहा कि वह कमरे के बाहर की तरफ ही नाइट ड्यूटी पर थी और वहां पूरी रात कोई नहीं था इसी तरह हर रोज रात के समय कोई व्यक्ति गदा लेकर उनके कमरे के बाहर पहरा देने आ जाता मगर स्कोर वह नहीं लिखते मेरे पिताजी के मन में बजरंगबली के प्रति श्रद्धा और बढ़ गई और उन्होंने श्री हनुमान चालीसा का पाठ जारी रखा कुछ ही दिनों में अचानक मेरे पिताजी का शरीर ठीक होने लगा और वह चलने फिरने लगे डॉक्टर भी काफी हैरान हुए कि बिना कुछ खाए पिए ही शरीर में सुधार आ गया एक सत्य घटना है जहां बजरंगबली ने साक्षात रूप से असंभव को संभव किया तो

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