हनुमानजी अपने डॉक्टर भक्त की नौकरी के लिए खुद सिफारिश करने गए थे - हनुमानजी के चमत्कार की सच्ची घटना
लाल बटन पर क्लिक करिए बैल आइकॉन को दबाइए ताकि आने वाली नई वीडियोस आप सबसे पहले देख सके आज हम दिन का अनुभव शेयर करेंगे वही पढ़े-लिखे हाई क्वालीफाई डॉक्टर हैं आप सोच रहे होंगे कि आज की जनरेशन के डॉक्टर से इतने धार्मिक कैसे हो गए दोस्तों आपको बता दें कि आप किसी भी ज्ञाती या वर्ग के हो अमीर हो या गरीब पढ़े लिखे हो या फिर अनपढ़ अगर आप ऊपर वाले को दिल से याद करेंगे ना तो वह कभी आपके आंखों में आंसू नहीं आने देंगे और आप की हर ख्वाहिश पूरी करेंगे यह वीडियो उसी का सबसे बड़ा एग्जांपल यानी उदाहरण है दोस्तों यह एक सच्ची घटना है जहां बजरंगबली ने अपने साक्षात रुप से असंभव को संभव किया तो आइए आप सभी के सामने पेश करते हैं हमारे सब्सक्राइब में अनुभव किया हुआ श्री हनुमान जी का चमत्कार तो रिक्वेस्ट ता हूं कि इस वीडियो को आप आखिर तक जरूर देखिएगा वैशाली वीडियो का लास्ट पार्ट मिस मत करिएगा दोस्तों मैं पेशे से डॉक्टर हूं और गुजरात के बरोड़ा में रहता हूं हमारे इष्ट देव भगवान श्रीराम है तो बचपन से ही हम लोग अपने दादाजी के साथ श्री राम जी की पूजा करते थे जैसे ही आपको पता है कि श्री राम जी को हनुमान जी बहुत प्रिय है वैसे ही हनुमान जी को श्री राम जी तो हम भी श्री हनुमान जी को बहुत मानते हैं यह तब की बात है जब मैं अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद इंटर्नशिप में पार्ट टाइम नौकरी करता था लेकिन मेरे इंटर्नशिप खत्म होने के बाद मुझे किसी हॉस्पिटल में नौकरी चाहिए थी बहुत ही मेहनत के बावजूद भी मुझे अच्छी नौकरी नहीं मिल रही थी मैं अपने घर से दूर रहता हूं मेरा नेट कलोल तालुका के नजदीक एक गांव में है लेकिन नौकरी न मिलने से निराश होकर और थकान की वजह से मैंने अपने घर पर तीन से चार दिन जाकर आराम करने के बारे में सोचा लेकिन वहां जाकर मैंने जो सोचा था उससे कुछ अलग ही हुआ मेरे पापा मुझसे खुश नहीं थे उनको लगता था कि मैं अपना हंड्रेड परसेंट नौकरी ढूंढने के लिए नहीं दे रहा हूं और जितने दिन में वहां राह भी मुझे बात-बात पर गुस्सा करने लगते थे और उस वक्त मेरे पास कोई वाहन नहीं था फिर भी मैं रिक्शा से या किसी से लिफ्ट लेकर मुझे जहां पर बायोडाटा देने के लिए जाना था वहां पर जाता था उस वक्त गर्मियों का मौसम था जिसकी वजह से मैं पहले से ही काफी परेशान था पर फिर भी मैं 13 दिनों तक नौकरी ढूंढ रहा फिर भी मुझे हर जगह पर अनुभव कम होने की वजह से नौकरी नहीं मिल रही थी इसीलिए इन सब से थक कर मैं घर गया था लेकिन वहां जाकर मैंने जो सोचा उससे कुछ अलग ही हुआ था इसी वजह से मैं वापस बरोड़ा आ गया था मुझे आज भी याद है बरोड़ा आते ही मैं उस दिन बहुत रोया था एक ब्राह्मण परिवार का सदस्य होने की वजह से मेरे माता पिता के संस्कार थे कि हर रोज सुबह ना धोकर पूजा करना बरोड़ा आए हुए मुझे 5 साल हुए थे फिर भी मैंने उस संस्कार को बुलाया नहीं था और मैंने अपने रूम में ही छोटा सा मंदिर रखा था हर रोज सुबह उठकर वहां पर पूजा करता था अपने नेट से वापस आने के बाद अगले दिन मैं सुबह उठकर पूजा कर रहा था उस वक्त भी मुझे नौकरी ना मिलने की वजह से और घर पर ऐसा होने की वजह से उदास था पर हिम्मत नहीं आ रहा था उस वक्त पूजा करते समय भी नौकरी की बात सोचते सोचते मैं फिर से रोने लगा जैसे ही हम सभी को मालूम है कि हनुमान जी राम भक्तों से बहुत प्रसन्न रहते हैं उसी वजह से मैंने हनुमान जी से पूजा करते समय प्रार्थना की कि आज मुझे नौकरी मिल जाए अगर मुझे नौकरी नहीं मिलती है तो मैं फिर कभी भी घर वापस नहीं जाऊंगा लेकिन उस वक्त हनुमान जी ने मेरी प्रार्थना सुन ली मैं जिस हॉस्पिटल में पहले तीन जाकर अपना बायोडाटा देकर आया था उसी हॉस्पिटल से मुझे कॉल आया कि हॉस्पिटल में वैकेंसी है अगर आप जॉब के लिए रेडी है तो मैंने तुरंत ही नौकरी के लिए हां कर दी मुझे अपने पसंद की जगह पर और अच्छी सैलरी में नौकरी मिल गई नौकरी पर लगने के थोड़े दिन बाद मुझे पता चला कि एक बहुत ही बड़ी कद काठी वाला आदमी हॉस्पिटल में आकर मेरी सिफारिश करके गया था अब हॉस्पिटल में भी उस आदमी को जो मेरी सिफारिश करने के लिए आया था कोई पहचानता नहीं था फिर भी उसकी बात मान कर मुझे नौकरी पर ले लिया गया बाकी इतने बड़े हॉस्पिटल में किसी को भी ऐसे तो नहीं ले लेते मैं उस बात की पड़ताल के लिए अपने हॉस्पिटल के हेड से मिलने गया तो उन्होंने बताया कि उस आदमी का व्यक्तित्व ही ऐसा था कि मैं उनकी कोई बात को टाल नहीं सका वह एक अलग व्यक्तित्व के मालिक लग रहे थे अब कोई माने या ना माने मेरे लिए तो वह खुद

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